राजनीति

CVC रिपोर्ट की वो बड़ी बातें जो आलोक वर्मा पर पड़ गईं भारी

NEW DELHI, INDIA - FEBRUARY 1: Former Delhi Police Commissioner Alok Verma taking charge as a CBI Director at CBI Headquarter, on February 1, 2017 in New Delhi, India. Alok Kumar Verma, a 1979 batch Arunachal Pradesh-Goa-Mizoram and Union Territory (AGMUT) cadre IPS officer, took over as the Director of the Central Bureau of Investigation. Verma started his career as an Assistant Commissioner of Police (under training) in Delhi Police on December 24, 1979. He was the Delhi Police Chief for 11 months. (Photo by Ravi Choudhary/Hindustan Times via Getty Images)
Written by Taasir Newspaper

Taasir Urdu News Network | Uploaded on 11-January-2019

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के गंभीर आरोपों के बाद से विवादों में घिरे CBI के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विसेज एंड होमगार्ड का पद संभालने से इनकार कर दिया था. बता दें कि गुरुवार को सेलेक्शन कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटा दिया था. इसके बाद उन्हें फायर सर्विसेज एंड होम गार्ड का डायरेक्टर बनाया गया था.

सेलेक्शन कमेटी में पीएम मोदी, कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे. आलोक वर्मा के खिलाफ 2-1 से फैसला लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी सीवीसी की सिफारिश के अनुसार आलोक वर्मा को हटाने के हक में थे. जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया.

आलोक वर्मा पर हैं भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

CVC ने अपनी रिपोर्ट में आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही सीबीआई के रिकॉर्ड निकालकर आलोक वर्मा के खिलाफ फौरन जांच करने की भी बात कही. सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आलोक वर्मा को मोइन कुरैशी और अन्य के मामले की जांच बंद करने के लिए सतीश बाबू साना ने 2 करोड़ रुपये की घूस दी. आलोक वर्मा ने सीबीआई की जांच से IRCTC मामले के मुख्य आरोपी राकेश सक्सेना को बचाने की कोशिश की.

आइए जानते हैं कि सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में क्या-क्या बातें कहीं

– सीवीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा पर मोइन कुरैशी केस में सतीश बाबू साना से 2 करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप था.

– आलोक वर्मा पर आईआरसीटीसी केस में लालू प्रसाद यादव के परिसर में तलाशी नहीं लेने के निर्देश सीबीआई के संयुक्त निदेशक को जारी करने का आरोप था. सीबीआई निदेशक पर सीबीआई को चलाने में ऐसे ही कुछ और गंभीर आरोपों की बात कही गई थी.

– निदेशक को इन आरोपों के संबंध में 14 सितंबर 2018 को कमीशन के सामने जरूरी फाइल और दस्तावेज पेश करने को 3 नोटिस जारी किए गए थे.

– सीबीआई ने 18 सितंबर को राकेश अस्थाना के संबंध में कमीशन को लिखी चिट्ठी में कहा था कि संबंधित अधिकारी पर केस में लगे आरोप सच प्रतीत होते हैं. उनके खिलाफ आधे दर्जन से ज्यादा केस में आपराधिक कदाचार के सबूत पाए गए थे.

–  सीबीआई ने 19 सितंबर को चिट्ठी लिखकर कमीशन से कहा कि मोइन कुरैशी केस के दस्तावेज विभिन्न शाखाओं से जमा किए जा रहे हैं. कमीशन ने सीबीआई से इस केस की ओरिजनल नोटशीट फाइल और रिकॉर्ड 24 सितंबर तक पेश करने को कहा.

–  इस दौरान सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने कई बार आलोक वर्मा पर मौखिक और लिखित आरोप लगाए और कहा कि उनके द्वारा लगाए गए 6 आरोपों की जांच से आलोक वर्मा और एके शर्मा को अलग किया जाए. इसके बाद कमीशन ने 25 सितंबर को कहा कि कमीशन को सीबीआई के किसी अधिकारी के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन उसे जांच में निष्पक्षता बरतनी चाहिए.

– 3 अक्टूबर तक कोई जवाब नहीं मिलने पर सीबीआई निदेशक से सीवीसी से 4 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में मुलाकात करने को कहा गया. इसमें सीबीआई निदेशक नहीं आए.

– इस दौरान पता चला कि 15 अक्टूबर को सीबीआई ने हैदराबाद के सतीश बाबू साना की शिकायत पर एक केस दर्ज किया है, जो कि सीबीआई के विशेष निदेशक द्वारा जांच किए जा रहे मामले में आरोपी है.

– 22 अक्टूबर को सीबीआई की SIT के संयुक्त निदेशक साईं मनोहर ने कमीशन को राकेश अस्थाना के रिकॉर्ड के हवाले से चिट्ठी लिखी कि मोइन कुरैशी केस में सूत्रों के हवाले से पता चला है कि सीबीआई निदेशक को 2 करोड़ रुपये की घूस दी गई.

– सीवीसी ने आरोप लगाया कि उसने इस बात को गौर किया कि सीबीआई ने इसी तरह दूसरे मामलों में भी रिकॉर्ड नहीं पेश किए.

– सीवीसी ने कहा कि सीबीआई ने मामले की जांच में सहयोग नहीं किया. सीवीसी के काम में जानबूझकर रोड़ा अटकाया गया.

– रिपोर्ट में कहा गया कि CVC एक्ट के सेक्शन 8 (1) (a) सीवीसी को सीबीआई के कार्यों की निगरानी करने का अधिकार है. जहां तक भ्रष्टाचार के इन आरोपों की बात है, तो भ्रष्टाचार कानून के तहत सीवीसी इसकी जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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