राजनीति

वाराणसी से चुनाव लड़ सकती हैं प्रियंका गांधी, पीएम मोदी से होगा मुकाबला

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Written by Taasir Newspaper

Taasir Hindi News Network | Uploaded on 24-April-2019

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं. एनडीटीवी को सूत्र के हवाले से खबर मिली है कि वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की संभावना है. वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 29 अप्रैल है. कांग्रेस के करीबी सूत्र ने एनडीटीवी से कहा कि वाराणसी से चुनाव लडऩे पर प्रियंका गांधी ने हामी भर दी है, लेकिन अंतिम फैसला राहुल गांधी को करना है. हालांकि, इससे पहले राहुल गांधी ने यह संकेत दिया था कि हम इस मामले में आपको थोड़ा सस्पेंस में रखना चाहते हैं. लगता है कि अब वह सस्पेंस खत्म होने वाला है. इतना ही नहीं, प्रियंका गांधी को पीएम मोदी के साथ दो-दो हाथ करने से कोई परहेज नहीं है. प्रियंका को इस बात की भी परवाह नहीं है कि वाराणसी के क्या परिणाम होंगे.

 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब से प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया गया है, तब से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और यदि वाराणसी से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ती हैं तो पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश पर इसका असर पड़ेगा. कांग्रेस को यह उम्मीद है कि प्रियंका के चुनाव लड़ने से वैसे कांग्रेसी भी बाहर निकलेंगे, जो अभी तक घरों में बैठ गए थे. प्रियंका गांधी से जब भी चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया उन्होंने कहा कि वह हर तरह से तैयार हैं. यहां तक कि रविवार को उनसे वाराणसी से चुनाव लड़ने को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर पार्टी कहेगी तो मैं तैयार हूं. इससे पहले भी प्रियंका के चुनाव लड़ने की बात उठ चुकी है, मगर तब नाम रायबरेली सीट का आ रहा था. यह कहा जा रहा था कि अगर सोनिया की तबीयत ठीक नहीं होती है तो प्रियंका रायबरेली से लड़ेंगी. मगर अब सोनिया गांधी रायबरेली से पर्चा भर चुकी हैं.

पिछले दिनों जब प्रियंका गांधी से सवाल किया गया कि क्या वह वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लडेंगी, तो उन्होंने कहा था, मैंने लगातार कहा है कि मैं वही करूंगी, जो पार्टी मुझसे करने के लिए कहेगी. अगर कांग्रेस अध्यक्ष उन्हें चुनाव लड़ने को कहेंगे तो वह लड़ेंगी.’

राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा गया था कि क्या उनकी बहन प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी तो उन्होंने जवाब दिया, ‘आप खुद अंदाजा लगाइए. अंदाजा हमेशा गलत नहीं होता.’ जब राहुल गांधी से फिर पूछा गया कि क्या आप इससे इनकार नहीं कर रहे तो उन्होंने कहा, ‘मैं ना इसकी पुष्टि कर रहा हूं और ना ही इनकार कर रहा हूं.’

वाराणसी सीट का हिसाब-किताब: जातिगत समीकरण की बात की जाए तो वाराणसी में बनिया मतदाता करीब 3.25 लाख हैं जो कि बीजेपी के कोर वोटर हैं. अगर नोटबंदी और जीएसटी के बाद उपजे गुस्से को कांग्रेस भुनाने में कामयाब होती है तो यह वोट कांग्रेस की ओर खिसक सकता है. वहीं ब्राह्मण मतदाता की संख्या ढाई लाख के करीब है. माना जाता है कि विश्वनाथ कॉरीडोर बनाने में जिनके घर सबसे ज्यादा हैं उनमें ब्राह्मण ही हैं और एससी/एसटी संशोधन बिल को लेकर भी नाराजगी है. यादवों की संख्या डेढ़ लाख है. इस सीट पर पिछले कई चुनाव से यादव समाज बीजेपी को ही वोट कर रहा है. लेकिन सपा के समर्थन के बाद इस पर भी सेंध लग सकती है. वाराणसी में मुस्लिमों की संख्या तीन लाख के आसपास है. यह वर्ग उसी को वोट करता है जो बीजेपी को हरा पाने की कुवत रखता हो.

 

इसके बाद भूमिहार 1 लाख 25 हज़ार, राजपूत 1 लाख, पटेल 2 लाख, चौरसिया 80 हज़ार, दलित 80 हज़ार और अन्य पिछड़ी जातियां 70 हज़ार हैं. इनके वोट अगर थोड़ा बहुत भी इधर-उधर होते हैं तो सीट का गणित बदल सकता है. आंकड़ों के इस खेल को देखने के बाद अगर साझेदारी पर बात बनी और जातीय समीकरण ने साथ दिया तो प्रियंका गांधी मोदी को टक्कर दे सकती हैं. हालांकि मोदी ने जिस तरह से पिछले साढ़े चार सालों में वाराणसी में विकास के जो काम किया है क्या उसे नजरंदाज किया जा सकता है, यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है. लेकिन अगर प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो हार जीत से पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक बड़ा संदेश में कामयाब हो जाएगी.

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