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अब देसी गाय की नस्ल के बचाव के लिए आगे आया सुप्रीम कोर्ट

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Written by Taasir Newspaper

Taasir Hindi News Network | Uploaded on 22-July-2019

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया, जिसमें देसी नस्ल की गाय आदि के वध पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. मथला चंद्रपति राव द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों को गैरकानूनी तरीके से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने और उच्चतम न्यायालय के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दायर करने के लिए भी निर्देश देने की मांग की.

हाल ही में मवेशियों के राष्ट्रीय आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति गुमान लाल लोढा द्वारा भारत सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा है कि इस रिपोर्ट में दुधारू गायों और बछड़ों के वध पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है.

सुप्रीम कोर्ट से मांगे गए दिशा-निर्देश:

भारत में देसी नस्लों/प्रजातियों के मवेशियों की गिरावट को रोकने के लिए तुरंत निवारक कदम उठाएं और प्रभावी रूप से राष्ट्रीय गोकुल मिशन को लागू करें.

भारत में मवेशियों की विदेशी नस्लों के साथ क्रॉस ब्रीडिंग और ब्रीडिंग को बढ़ावा ना देने के लिए उत्तरदाताओं को निर्देशित करना ताकि वो मवेशियों की देसी प्रजातियों के लिए न्यूनतम हस्तक्षेप और बीमारी के जोखिम को नियंत्रित करें.

स्वदेशी नस्ल के दुधारू पशुओं का वध नहीं हो ये सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देश जारी हों.

 स्वदेशी मवेशियों के दूध के उत्पादन में सुधार के लिए अनुसंधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देंश जारी हों.

देश के किसी भी हिस्से में गायों के वध की अनुमति नहीं दी जाए और संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने के लिए उत्तरदाताओं को तत्काल कदम उठाने का निर्देश दें.

उत्तरदाताओं को इस  न्यायालय के समक्ष गैर-अधिकृत बूचड़खानों को बंद करने और अनुपालन रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दें.

उत्तरदाताओं को विदेशी बैल और बैल के आयात को प्रतिबंधित करने को कहा जाए ताकि क्रॉस ब्रीडिंग को रोका जा सके

देश में मौजूदा विदेशी सांडों और बैलों की नसबंदी करने के लिए उत्तरदाताओं को निर्देशित करें ताकि क्रॉस ब्रीडिंग को रोका जा सके.

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