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अयोध्या पर SC में तीखी बहस: मुस्लिम पक्ष ने फाड़ा हिंदू पक्ष का नक्शा तो CJI बोले- हम उठकर चले जाएंगे

Supreme Court
Written by Taasir Newspaper

Taasir Hindi News Network | Uploaded on 16-Oct-2019  

 नई दिल्ली: अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आखिरी सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने अन्य कुछ याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया और सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अब बहुत हो चुका, हम शाम को पांच बजे उठ जाएंगे. इसके बाद 40वें दिन कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. हिंदू पक्ष की ओर से अपनी दलीलें रखी जा रही हैं. सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिन्दू महासभा के वकील विकास सिंह की ओर से पेश कि गए नक्शे को फाड़ दिया. इसके बाद सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अगर कोर्ट का डेकोरम नहीं बनाया रखा गया तो हम कोर्ट से चले जाएंगे.

Supreme Court Ayodhya Case Hearing Live Updates:

– अखाड़ा के सेवादार के अधिकार को किसी ने भी चुनौती नहीं दी है सिर्फ सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने वहां पर अपने अधिकार की मांग की. – सुशील जैन: हमारा दावा मन्दिर की भूमि और स्थाई सम्पत्ति पर मालिकाना अधिकार और सेवायत के अधिकार को लेकर है. मुस्लिम पक्षकारों के इस दावे में भी दम नहीं कि 22/23 दिसंबर 1949 की रात बैरागी साधु जबरन इमारत में घुसकर देवता को रख गए. ये मुमकिन ही नहीं कि मुसलमानों के रहते इतनी आसानी से वो घुस गए. जबकि 23 दिसंबर को जुमा था.-निर्मोही अखाड़े की कहानी शिवाजी महाराज से शुरू हुई. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यहां इसका क्या संबन्ध है.

– सुशील जैन: हम भले कुछ कमजोर हुए पर शिवाजी महाराज के राज में हम शक्तिशाली थे. कोई सबूत नहीं कि बाबर ने अयोध्या में मस्जिद बनाई. – जस्टिस चंद्रचूड़- आप मस्जिद बनाने को लेकर नहीं डेडिकेशन यानी समर्पण /लोकार्पण को लेकर जवाब दें. मस्जिद का नाम भी जन्मभूमि मस्जिद है. पूरी इमारत को किसी ने डेडिकेट नहीं किया. ये यूजर्स डेडिकेशन है.- विकास सिंह: बाबर उदार लेकिन औरंगजेब कट्टर शासक था. बाबरनामा में ऐसी कोई बात का जिक्र नहीं मिलता.

– साल 1860 का अंग्रेज़ी हुकूमत के ग्रांट का बोर्ड ऑफ कंट्रोल का दस्तावेज कोर्ट के सामने रखा जिसमे मुसलमानों ने ग्रांट का ज़िक्र किया है. जबकि 1858 में बोर्ड भंग हो गया था तो 1860 में कैसे दस्तावेज़ जारी हुआ. 1863 में भी ऐसा ही दिखाया गया और उसे मस्जिद पर कब्जे और मालिकाना हक का आधार बताया गया.

– विकास सिंह ने बुकानन और स्त्रम थेलर की किताबों के हवाले से कहा कि इनमें रामजन्म स्थान की लोकेशन है. तो धवन बोले कि आपने कोर्ट में मजाक बना रखा है. ऑक्सफोर्ड की किताब के हवाले से भी विकास सिंह ने राम जन्मस्थल की सही जगह बताई.

– विकास सिंह ने कहा कि मैं हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एक नक्शा दिखाना चाहता हूं. तो धवन ने कहा कि धवन कहा कि यह भी किताब का हिस्सा है. मैं किसी भी सूरत में इसे मंजूरी नहीं दे सकता. ये कहते हुए धवन ने नक्शा फाड़ डाला. पांच टुकड़े कर दिए.

– विकास सिंह ने कोर्ट को बुक दी. CJI ने कहा कि वो नवंबर में इस किताब को पढेंगे. विकास सिंह के कहा कि फैसले से पहले इस किताब को पढ़िएगा. राजीव धवन के बार बार टोकने पर विकास सिंह नाराज हो गए. और कहा कि हमारे पास कम समय है उसके बाद भी राजीव धवन बार बार टोक रहे है.- हिन्दू महासभा की तरफ से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बहस शुरू की. विकास सिंह ने किशोर कुणाल की लिखी किताब को रिकॉर्ड पर कोर्ट के समक्ष रखने की पेशकश की. मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया. राजीव धवन ने कहा ये नई किताब है.

– रंजीत कुमार: जन्मभूमि का महत्व भी कैलास मानसरोवर जैसा है. मैं वहां गया तो देखा कि हिन्दू ही नहीं बौद्ध भी उस पर्वत की पूजा उपासना करते हैं. बौद्ध वहां के पत्थरों पर पताका लगाकर उसे ज्वेल ऑफ स्नो या रिन पो छे कहते हैं. पूरा पर्वत बिना किसी प्रतिमा के पवित्र और पूजनीय स्थल माना जाता है.

– मध्यस्थता पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की- सी एस वैधनाथन के बाद गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार बहस ने बहस शुरू की. CJI ने रंजीत कुमार को कहा कल आपने कहा था कि आप केवल 2 मिनट बहस करेंगे. रंजीत कुमार ने कहा कि दो मिनट में बहस कैसे पूरा करूंगा. CJI ने मुस्कुराते हुए कहा कि कल तो आप 2 मिनट कह रहे थे. – सी एस वैधनाथन ने बहस पूरी करते हुए कहा कि बिना संपति के मालिक हुए ‘मुस्लिम पक्ष मालिकाना हक का दावा कर रहा है.’

– सवा ग्यारह बजते ही राजीव धवन ने खड़े होकर कहा कि 45 मिनट हो गए हैं. अब इनकी बहस का समय खत्म हो गया. CJI ने मुस्कुराते हुए कहा अभी 10 मिनट बचे हैं, क्योंकि हम दस मिनट देर से बैठे थे.- वैद्यनाथन ने अपनी बहस आगे बढ़ाई तो CJI ने आगाह किया कि 5 मिनट में अपना जवाब पूरा कर लें.- वैद्यनाथन- हालांकि दोनों पक्ष वहां उपासना कर रहे थे. लेकिन मस्जिद को वक़्फ़ करने या डेडिकेशन का कोई प्रमाण या सबूत किसी के पास नहीं है.

– वैधनाथन: ट्रांसलेशन को लेकर 8 वर्षों से कोई आपत्ति नहीं जताई गई. मुस्लिम पक्षकारों को जिरह करने का पर्याप्त अवसर दिया गया. मुस्लिम कह रहे है कि हमने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की. वक्फ वह सिर्फ दावा कर रहे है, उनको दस्तवेज़ दिखाना चाहिए. उनकी तरफ से माना गया कि हिन्दू वहां पूजा कर रहे थे और हिंदुओं को वहां से हटाने की कोशिश की गई.- वैधनाथन: अगर हम जन्मस्थान पर विश्वास नहीं करेंगे तो फिर हम कहां करेंगे. रामलला विराजमान ने दावा किया 1934 तक ही विवादित स्थल पर नवाज हुई.- हिंदू पक्ष के वकील सी एस वैद्यानाथन का जवाब: मुस्लिम कहते हैं कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान था. यह छोटी जगह को बांटने का एक प्रयास था. श्रद्धालु आंतरिक गुबंद में भी पूजा अर्चना करते रहे हैं.

– सी एस वैद्यानाथन: हम आंतरिक आंगन में प्रार्थना कर रहे थे. लेकिन बाद में रेलिंग के कारण और कानून और व्यवस्था की समस्याओं को हल करने के लिए लगाए गए प्रतिबंध के कारण ये बंद हो गया. विवादित स्थल में 1949 तक वहां अंदर मूर्ति नहीं थी और साप्ताहिक नमाज़ होती थी.- हाईकोर्ट के फैसले के हवाले से वैद्यनाथन ने सुन्नी बोर्ड के दावे को काटते हुए कहा कि जब ज़मीन का मालिक तत्कालीन हुकूमत थी और उन्हीं की देखरेख में मस्जिद बनाई गई तो सुन्नी बोर्ड ने उसे कैसे डेडिकेट किया? – अयोध्या मामले पर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अब बहुत हो चुका, हम पांच बजे उठ जाएंगे- सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अन्य अर्जियों पर सुनवाई से किया इनकार

मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक हिन्दू पक्ष ने दलील दी कि भारत विजय के बाद मुगल शासक बाबर द्वारा करीब 433 साल पहले अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ‘ऐतिहासिक भूल’ की गयी थी और अब उसे सुधारने की आवश्यकता है.

पीठ के समक्ष एक हिन्दू पक्षकार की ओर से पेश पूर्व अटार्नी जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण ने कहा कि अयोध्या में कई मस्जिदें हैं जहां मुस्लिम इबादत कर सकते हैं लेकिन हिन्दू भगवान राम का जन्म स्थान नहीं बदल सकते. सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा 1961 में दायर मामले में प्रतिवादी महंत सुरेश दास की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि विदेशी शासक बाबर द्वारा की गयी ऐतिहासिक भूल को सुधारने की जरूरत है. बाबर ने भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ऐतिहासिक भूल की और कहा कि मैं बादशाह हूं और मेरा आदेश ही कानून है.उन्होंने कहा, ‘अयोध्या में मुस्लिम किसी भी अन्य मस्जिद में इबादत कर सकते हैं. अकेले अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं. लेकिन, हिंदुओं के लिए यह भगवान राम का जन्म स्थान है…जिसे हम बदल नहीं सकते.’

संविधान पीठ ने परासरण से परिसीमा के कानून, विपरीत कब्जे के सिद्धांत और अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि से मुस्लिमों को बेदखल किये जाने से संबंधित अनेक सवाल किये. पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या मुस्लिम अयोध्या में कथित मस्जिद छह दिसंबर, 1992 को ढहाये जाने के बाद भी विवादित संपत्ति के बारे में डिक्री की मांग कर सकते हैं?पीठ ने परासरण से कहा, ‘वे कहते हैं, एक बार मस्जिद है तो हमेशा ही मस्जिद है, क्या आप इसका समर्थन करते हैं.’ इस पर परासरण ने कहा, ‘‘नहीं, मैं इसका समर्थन नहीं करता. मैं कहूंगा कि एक बार मंदिर है तो हमेशा ही मंदिर रहेगा.’

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