राजनीति

महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर संजय निरुपम ने Congress-NCP को किया आगाह, कही यह बात

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Written by Taasir Newspaper

Taasir Hindi News Network | Uploaded on 09-Nov-2019 

नई दिल्ली: मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने राज्य के उन नेताओं की आलोचना की जो महाराष्ट्र में अगली सरकार गठन के लिए शिवसेना को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं. बता दें, महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला अभी भी उलझा हुआ है. सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बहुमत न होने के चलते सरकार बनाने से इंकार कर दिया है. वहीं, बीजेपी के इंकार के बाद राज्यपाल भरत कोश्यारी ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार गठन का निमंत्रण दिया है. शिवसेना को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन की जरूरत है और दोनों पार्टियों के नेता भी इस समर्थन के पक्ष में बोलते नजर आ रहे हैं. इस बीच संजय निरुपम ने अपनी पार्टी कांग्रेस और सहयोगी पार्टी एनसीपी को आगाह करते हुए कहा कि भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच चल रही जुबानी जंग कुछ और नहीं बल्कि ‘नाटक’ है और कांग्रेस को इससे दूर रहना चाहिए.

मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘उन्हें क्या हो गया है? कोई कांग्रेसी नेता शिवसेना को समर्थन के बारे में सोच भी कैसे सकता है?’ निरुपम ने कहा, ‘कांग्रेस को शिवसेना के नाटक में नहीं उलझना चाहिए. यह झूठा है. यह सत्ता में ज्यादा साझेदारी के लिए उनका अस्थायी झगड़ा है.’ बता दें, हाल में हुए विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर निरुपम पार्टी से नाखुश थे. कांग्रेस में शामिल होने से पहले शिवसेना से जुड़े रहे निरुपम ने कहा, ‘मेरी समझ के मुताबिक शिवसेना कभी भी भाजपा के साए से बाहर नहीं आएगी.’

इसके साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ ‘गलबहियां करने’ को लेकर आगाह भी किया. उन्होंने कहा, ‘यह एक निरर्थक कवायद होने जा रही है. उम्मीद है कि राज्य के नेता इस सच को समझेंगे. इसके बजाए हमें 2014 के विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार अपनी पार्टी का मत प्रतिशत दो फीसद कम होने को लेकर आत्ममंथन करना चाहिए.’ निरुपम ने कहा, ‘हम 17 फीसद से गिरकर 15 फीसद पर पहुंच गए हैं (मत प्रतिशत के मामले में). एक दल के तौर पर हम तीसरे से चौथे स्थान पर खिसक गए हैं.’

बता दें, कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण व पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि अगर शिवसेना उनकी पार्टी के समर्थन से सरकार बनाना चाहती है तो उसे भाजपा से अलग होना होगा. वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे और सुशील कुमार शिंदे जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवसेना के साथ किसी भी तरह के रिश्ते के खिलाफ हैं. शिंदे कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष दल है. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस और शिवसेना विचारधारा के स्तर पर बिल्कुल अलग हैं और मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही कह चुके हैं कि दोनों दलों के साथ आने का सवाल ही नहीं है.’

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