झारखंड रामगढ़

गृहमंत्री के वन महोत्सव पर लगा ग्रहण, ना वृक्ष बचे, ना शीलापट्ट

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Written by Taasir Newspaper
TAASIR HINDI NEWS NETWORK ABHISHEK SINGH 
रामगढ़ 30 अक्टूबर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री प्रहलाद जोशी के वन महोत्सव कार्यक्रम पर ग्रहण लग गया है।
ग्रहण लगाने वाले भी कोई और नहीं बल्कि सीसीएल के अधिकारी की हैं। रामगढ़ में भी इस महोत्सव के तहत कायाकल्प वाटिका का निर्माण होना था। जिस जगह पर अमित शाह और पहला जोशी ने शिलान्यास किया था, वहां ना तो कोई पौधा बचा है और ना ही शीलापट्ट। बरका सायल प्रक्षेत्र के बलकुदरा खुली खदान के बंद पड़े क्षेत्र में इको पार्क की तर्ज पर कायाकल्प वाटिका का निर्माण होना था। 23 जुलाई को जब यहां ऑनलाइन शिलान्यास होना था, उस वक्त अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन और पोषण का दंभ भरा था। लेकिन 4 महीने बाद ही सारे दावों की हकीकत सामने आ गई। जिस बंद पड़े खुले खदान को इको पार्क के रूप में तब्दील किया जाना था, वह पूरा इलाका आज भी वीरान और बंजर है। शिलान्यास के समय मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों ने 2-2 पौधे लगाए थे। इसके अलावा पूरे इलाके में 10 हजार पौधों का वितरण किया गया था।
ताकि सीसीएल कर्मचारी और ग्रामीण अपने क्षेत्र में फलदार वृक्ष लगाकर अपने आय के स्रोत को बढ़ा सकेंगे।
लेकिन 10,000 पौधों के वितरण और वृक्षारोपण के बाद नतीजा शून्य पर ही अटका हुआ है। 
5 हेक्टेयर जमीन से शुरू हुआ था वाटिका का निर्माण
वन महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए बरका सायल प्रक्षेत्र के जीएम अमरेश कुमार सिंह ने बताया था कि कायाकल्प वाटिका का निर्माण 5 हेक्टेयर जमीन से शुरू किया गया है। इस पूरे एरिया में फलदार वृक्ष लगाने के अलावा बच्चों और सीनियर सिटीजन के लिए भी स्थान बनाया जाना था। पौधारोपण के लिए 25 लाख रुपए का आवंटन भी सीसीएल के सीएमडी के द्वारा किया गया था। इसके बाद फेंसिंग, गेट निर्माण और सुंदरीकरण के लिए भी बजट तैयार किया गया था। 5 हेक्टेयर में पौधारोपण होने के बाद इसका विस्तार 25 हेक्टेयर और फिर 85 हेक्टेयर में कायाकल्प वाटिका के निर्माण की योजना थी।
 4 महीने में भी नहीं शुरु हुई योजना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ कोयला एवं खान मंत्री प्रहलाद जोशी ने वन महोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत तो की लेकिन रामगढ़ में यह योजना 4 महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई 23 जुलाई को बल कुदरा खुली खदान ने शिलान्यास करने के बाद अधिकारी जो गए वे लौटकर दोबारा आए ही नहीं। यह स्थल अब अधिकारियों की बाट जोह रहा है।
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