बिहार राज्य बेगूसराय

एशिया प्रसिद्ध कल्पवास मेला के आयोजन पर लगी रोक, कोरोना के कारण मेला स्थगित

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Written by Taasir Newspaper
TAASIR HINDI NEWS NETWORK ABHISHEK SINGH 

बेगूसराय, 14 अक्टूबर

बिहार के चर्चित आध्यात्मिक और मोक्ष स्थली सिमरिया का गंगा धाम में इस वर्ष भी कल्पवास मेला नहीं लगेगा। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर डीएम ने कार्तिक माह में लगने वाले कल्पवास मेला के आयोजन पर रोक लगा दिया है। जिला प्रशासन द्वारा कल्पवास मेला स्थगित रहने से संबंधित बैनर सभी प्रमुख जगहों पर लगा दिया गया है।

डीएम अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि सिमरिया में कल्पवास मेला (मास मेला) 18 अक्टूबर से 19 नवंबर तक लगना है लेकिन कोरोना वायरस जनित महामारी की दूसरी लहर एवं संभावित तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए मेला को स्थगित कर दिया गया है।

डीएम ने बताया कि सिमरिया कल्पवास मेला में अत्यधिक संख्या में गंगा स्नान करने श्रद्धालु आते हैं एवं एक माह तक झोपड़ी या टेन्ट में रहकर कल्पवास मेला को पूरा कर घर वापस लौटते हैं। 27 सितम्बर को खालसा समिति के अध्यक्षों के साथ किए गए बैठक में सभी साधु-संतों द्वारा कोरोना गार्डड लाईन का पालन करने का भरोसा दिलाया गया।

खालसा समिति के द्वारा बताया गया कि कल्पवास मेला में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा, ताकि कल्पवासी का कल्पवास भंड नहीं हो। सबों द्वारा कोविड संक्रमण से बचाव के नियमों का अक्षरशः पालन करने का आश्वासन दिया गया लेकिन हरिद्वार एवं प्रयागराज में कोरोना के कारण बहुत सारे साधु-संतों की मृत्यु हुई है, इसे ध्यान में रखना होगा।

इस दुर्गा पूजा, दिपावली, छठ पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में बाहर के राज्यों से श्रद्धालु घर वापस आते हैं, जिससे कोरोना से संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। संभावित तृतीय लहर में चिकित्सकों द्वारा कोरोना संक्रमण के बदले हुए रूप में आने की संभावना व्यक्त की जा रही है जो प्रथम एवं द्वितीय लहर से ज्यादा विनाशकारी होगा।

यह लहर कब और किस रूप में संक्रमित करेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए सचेत और सतर्क रहने की आवश्यकता है, हमारा मूल उद्देश्य जीवन रक्षा करना ही है। अभी कोरोना संक्रमण का खतरा टला नहीं है, बल्कि और भी भयावह रूप में आने की संभावना है। कल्पवास मेला आयोजित होने से मानव जीवन को खतरा हो सकता है। इसलिए कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए जनहित एवं मानवहित में सिमरिया कल्पवास मेला को स्थगित कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि मिथिला के दक्षिणी प्रवेश द्वार सिमरिया गंगा घाट पर सदियों से कार्तिक महीने में कल्पवास मेला की परंपरा चलती आ रही है। कार्तिक महीने में पर्णकुटीर में बिहार, बंगाल, असाम, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ-साथ नेपाल के हजारों श्रद्धालु कल्पवास करते हैं। अहले सुबह गंगा स्नान के बाद तुलसी पूजन और सूर्य नमस्कार से इनकी आध्यात्मिक दिनचर्या शुरू हो जाती है।

इसके बाद मेला क्षेत्र के तमाम मंदिर, खालसा और सेवा शिविरों में सुबह से लेकर शाम तक श्रीमदभागवत कथा, कार्तिक महात्म्य, रामायण पाठ और मिथिला महात्म्य आदि का श्रवण कर श्रद्धालु आध्यात्मिक भक्ति की धारा में लीन रहते हैं, देर शाम गंगा आरती के बाद इनकी अध्यात्मिक दिनचर्या संपन्न होती है।

इस दौरान लोगों का भोजन भी पूरी तरह से सात्विक होता है तथा अधिकतर लोग गंगाजल में पकाया गया अरवा-अरवाइन भोजन ही करते हैं। 2019 और 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण कल्पवास के आयोजन पर रोक लगा दिया गया। इस वर्ष बीते तीन सितंबर को पटना में उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह समेत अन्य की उपस्थिति में सिमरिया के विकास के मुद्दे पर बैठक हुई थी।

बैठक में कल्पवास मेला पर भी चर्चा हुई तथा प्रधान सचिव आनंद किशोर द्वारा कहा गया था कि मेला में व्यवस्था के लिए एक से दो करोड़ रुपये आवंटित किया जा रहा है। इस घोषणा के बाद साधु संतों ने तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन अब संक्रमण बढ़ने की संभावना को देखते हुए डीएम द्वारा मेला आयोजन पर रोक लगा दी गई है।

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