बिहार राज्य

जल स्वच्छता एवं साफ-सफाई के लिए SABC मॉडल द्वारा शिवहर जिला ने सफल व्यव्हार परिवर्तन का मार्ग अपनाया

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Written by Taasir Newspaper

TAASIR HINDI NEWS NETWORK-NIRAJ KUMAR

बिहार

28 जून 2022,

आज होटल चाणक्य में वाटर फॉर पीपल द्वारा प्रसार कार्यशाला का आयोजन किया गया था , जहां मुख्य अतिथि के तौर पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री माननीय श्रवण कुमार एवं बिहार  सरकार पंचायती राज डायरेक्टर श्री रंजीत कुमार सिंह उपस्थित थे । आपको बताते चले की वाटर फॉर पीपुल एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो भारत में लंबे समय से बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और ओडिशा में वाश (वॉटर, सैनिटेशन, हाईजिन) पर काम कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रखा है। साथ में 2006 से चरणबद्ध तरीके से व्यापक तौर पर सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता संबन्धित व्यवहारों में बदलाव पर काम कर रहा है। वाटर फॉर पीपुल ने 2011 से बिहार में शिवहर जिले में ‘परियोजना शिवहर’ की शुरुआतकी थी। इस परियोजना के अंतर्गत सामुदायिक चापाकल निर्माण किये गए, स्कूलों में मॉडल वाश काम्प्लेक्स बनाये गए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मॉडल शौचालय का निर्माण कराया गया तथा व्यापक स्तर पर समुदाय के लोगों का स्वछता के प्रति व्यवहार में परिवर्तन लाया गया है।  प्रोजेक्ट शिवहर का मार्च 2022 में सफलता पूर्वक संपन्न किया है, प्रारंभ में यह सिर्फ  समुदाय और सरकार की      भागीदारी और चैरिटी वाटर जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय दाताओं के साथ पहुंच वाले हिस्से को संबोधित करने के लिए केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण था। लेकिन 2014 में  व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता को देखते हुए, वाटर फॉर पीपल और वन ड्रॉप फाउंडेशन ने प्रोजेक्ट शिवहर की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य  ए,बी,सी मॉडल पर काम करना था – जहाँ ( a -एक्सेस पानी  तक पहुँच),(B – बिहेवियर -स्वछता के लिए व्यवहार में बदलाव,स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं तक पहुंच ),(C – कैपिटल-पूंजी दृष्टिकोण से प्रबंधन की व्यापक समस्या का स्थायी समाधान करना है। जिसके तहत वाटर फॉर पीपल ने  शिवहर में 1220 वाटर पॉइंट स्थापित किए हैं, 1220 डब्ल्यूयूसी का गठन किया है, और समुदाय में स्थायी जल शासन के लिए 12,810 महिलाओं को सफलतापूर्वक सशक्त बनाया है। वोही इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री श्रवण कुमार ग्रामीण विकास मंत्री ने वर्चुअल (ऑनलाइन ) माध्यम से अपनी उपस्थिति दायर की और कहा कि समाज में बिना जागरूकता बदलाव संभव नहीं ,कोई भी कार्य तभी सफल हो सकता जब तक कार्य को जमीनी तौर पर समुदाय में  जागरूकता पर काम किया जाए ,उन्होंने वाटर फॉर पीपल इंडिया के प्रोजेक्ट शिवहर पर शुभकनाए दिया एवं आगे के जिले मुजफ्फरपुर एवं नालंदा में काम के लिए कहा की सरकार वाटर फॉर पीपल की इस काम में पूरी तरह सहयोग करेगा और चाहूंगा की और भी जिलों में जल संस्ग्रक्षण एवं स्वच्छता जैसे कार्यों को बढ़ाया जाए ।
वोही बिहार सरकार पंचायती राज के डायरेक्टर श्री रंजीत कुमार सिंह ने कहा की किसी भी  ग्रामीण  विकास  परियोजना में  अकेले सरकार द्वारा जमीनी तौर पर बदलाव संभव नहीं है ,जबकि अगर वाटर फॉर पीपल जैसी संस्था सरकार कार्यों में समर्थन करता है तो इससे बेहतर परिणाम मिलते हैं ,वाटर फॉर पीपल के प्रोजेक्ट शिवहर के सफलता पूर्वक कार्यों को देखते मुख्यमंत्री के पेयजल योजना के अंतर्गत हालिया में संस्थान एवं पंचायती राज ने एक एम ओ यू भी साइन किया है ।  स्वच्छ और स्वस्थ समुदायों के लिए शौचालय आवश्यक हैं और सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान करते हैं। जरूरत को देखते हुए लोगों के लिए ,वाटर फॉर पीपुल के फ्रंटलाइन टीमो  ने  प्रमुख वॉश व्यवहार, संचालन और रखरखाव हेतु कई कौशल पर क्षमता निर्माण प्रशिक्षण प्रदान करता रहा/ जिसके तहत ,समुदाय प्रबंधित तंत्र के तर्ज पर 4 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया  स्वास्थ्य केंद्रों में बने 5 मॉडल शौचालय बनाये गए स्कूलों में 233 मॉडल शौचालयों का निर्माण किया गया ,और आंगनवाड़ी केंद्र में 01 मॉडल शौचालय का संचालन किया गया / स्कूल वाश सुविधाओं का संचालन और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती थी। इसे दूर करने के लिए, और लंबे समय तक चलने वाले समाधान बनाने के लिए मॉडल टॉयलेट ब्लॉक के साथ-साथ साथी स्कूल  छात्रों के लिए सुविधाओं को बनाए रखने और अच्छे स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए 233  वाटसन समितियों का गठन किया गया। वाटर फॉर पीपल ने क्रमशः संचालन और रखरखाव और सफाई के लिए  ‘जलबंधु’-ग्रामीण जल मैकेनिक, निर्मल बंधु-स्वीपर के रूप में एक आत्मनिर्भर तंत्र का आविष्कार किया/  वाटर फॉर पीपल ने समुदाय के  व्यव्हार परिवर्तन के लिए सोशल आर्ट फॉर बिहेवियर चेंज (एसएबीसी) मॉडल का उपयोग करता है, जिसका उद्देश्य है की  स्थानीय कलाओं जैसे नुक्कड़ नाटक ,मल्टी डिसिप्लिनरी शो और कहानियों के माध्यम से व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार परिवर्तन को सुगम बनाना है। वाटर फॉर पीपल का मानना ​​है कि एसएबीसी हस्तक्षेप देश में स्थायी वॉश प्रथाओं को प्राप्त करने के लिए समुदाय में   महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 15 स्थानीय कलाकारों की 01 एमडीएस टीम बनाया गया ,60 स्थानीय कलाकार को जोड़कर  नुक्कड़ नाटक की 4 टीमों को प्रशिक्षित किया गया समुदायों की मदद से 4 लघु फिल्मों का निर्माण किया गया ,10 लोक कलाकारों की एक कहानी सुनाने वाली टीम बनाया गया,10 ग्राम पंचायत से  भित्ति कला कलाकारो  को जोड़ा गया  आईपीसी उपकरण और आईईसी सामग्री पढ़ने , देखकर सिखने के  लिए एक सेट त्यार कर समुदाय में वितरण किया गया।

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