TAASIR HINDI NEWS NETWORK ABHISHEK SINGH
50 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में सीआईडी को हाई कोर्ट की कड़ी फटकार, राज्य पर लगाया 50 लाख का जुर्माना
कोलकाता, 15 सितंबर
उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार महिला ॠणदान सहकारी समिति के खिलाफ 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सीआईडी को जमकर फटकार लगाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली की एकल पीठ में शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। इस मामले की जांच सीआईडी कर रही थी लेकिन जांच के तरीके से असंतुष्ट होकर हाई कोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांचों सौपी थी। शुक्रवार सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से शिकायत की गई कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सीआईडी ने उन्हें मामले की जांच से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिया है। इधर सीआईडी ने फैसले पर पुनर्विचार की अर्जी लगाई और कहा कि जांच सीआईडी को करने दी जाए। इसके बाद न्यायमूर्ति गांगुली ने सीआईडी अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि आप लंबे समय से जांच कर रहे थे लेकिन आपने क्या किया? कोई कार्रवाई की? कुछ भी हासिल किया? आपकी जांच की गति संतोषजनक नहीं थी, तभी तो सीबीआई को दी गई।
उन्होंने कहा कि 18 सितंबर तक हर हाल में सीबीआई को जांच से संबंधित सारे दस्तावेज उपलब्ध करवा देने होंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो राज्य के गृह सचिव को कोर्ट में हाजिर होना होगा। न्यायाधीश ने कहा कि यह भ्रष्टाचार छोटी बात नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोई सब्जी बेचता है तो कोई छोटा-मोटा रोजगार करके सहकारी समितियां में पैसा रखता है और उसे पूरे पैसे को गबन कर लिया गया है। मुझे पता है कि इसके पीछे कौन लोग हैं। जो लोग साइकिल से चलते थे वे आज गाड़ियों में घूम रहे हैं। कोर्ट ने सीबीआई को कहा कि इस मामले में चाहे जितने प्रभावशाली लोग हों, उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर पूछताछ करनी होगी। कोर्ट ने ईडी को भी इस मामले में धन-शोधन की जांच के आदेश दिए हैं।
दरअसल अलीपुरद्वार महिला ॠणदान सहकारी समिति में 21 हजाक 163 महिलाओं ने रुपये निवेश किए थे। कल्पना दास सरकार नाम की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया है कि इन महिलाओं के करीब 50 करोड़ रुपये गबन कर लिए गए हैं। इसी मामले में न्यायाधीश ने कहा कि इस वित्तीय भ्रष्टाचार के पीछे एक बहुत बड़ा गिरोह काम कर रहा है। करीब तीन सालों तक जांच के बावजूद सीआईडी ने जांच में कुछ भी हासिल नहीं किया। इसके बाद ही उन्होंने मामले को सीबीआई को सौंप दिया था।

