हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति मामले में जेपीएससी के प्रेस रिलीज पर लगाई रोक

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हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति मामले में जेपीएससी के प्रेस रिलीज पर लगाई रोक
रांची, 4 नवंबर 

झारखंड हाई कोर्ट में मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति को लेकर झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली 2018 की संशोधित नियमावली 2021 को चुनौती देने वाली मनीष मुंडा एवं अन्य की याचिका की सुनवाई शनिवार को हुई। चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जेपीएससी द्वारा जारी प्रेस रिलीज पर रोक लगा दी।
जेपीएससी ने प्रेस रिलीज कर बताया था कि झारखंड स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारी से ही इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगा गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि जेपीएससी की प्रेस रिलीज नियुक्ति प्रक्रिया के बीच में जारी की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जेपीएससी के इस प्रेस रिलीज पर रोक लगा दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है की याचिकाकर्ता यदि विज्ञापन के सारे अर्हता को पूरा करता है और क्वालीफाई करता है तो उसकी उसे नियुक्ति के लिए कंसीडर किया जाए। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और जेपीएससी से छह सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले के अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी।
जेपीएससी ने झारखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के 110 पदों के लिए विज्ञापन संख्या 6/ 2022 निकला था। याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा था कि विज्ञापन में झारखंड स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारी को नियुक्ति में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता ने संशोधित नियमावली 2021 का हवाला देते हुए कहा कि यह नियमावली संविधान के आर्टिकल 16 के खिलाफ है। नियमावली के कारण कई अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर हो गए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि नियमावली से अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय एवं सरकारी नौकरी वालों को अप्रत्यक्ष रूप से आरक्षण दिया गया है, जो संविधान के विरुद्ध है। यह पद वर्ग दो का है। इसमें देश के सभी नागरिक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।