आज के युवा विकसित भारत के हैं निर्माता : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत को नेक्स्ट जेनरेशन का यूनिकॉर्न देश बनाने के मिशन के तहत चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने कैंपस टैंक का किया लॉन्च
स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में उत्तर भारत को दक्षिण भारत के साथ कदम से कदम मिलाना होगा : केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह
हम भारत सरकार द्वारा 5000 यूनिकॉर्न बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए कर रहे काम : सांसद (राज्य सभा) सतनाम सिंह संधू
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं में स्टार्टअप की जगाई भावना, कैंपस टैंक एक ऐसा मंच है जो युवा नौकरी सृजकों का एक समूह बनाने में करेगा मदद : सांसद (राज्य सभा) सतनाम सिंह संधू
कैंपस टैंक के माध्यम से, हम केवल एक कार्यक्रम ही नहीं शुरू कर रहे हैं, बल्कि हम भारत में एंटरप्रेन्योरशिप की भावना को कर रहे प्रज्वलित : प्रोफेसर (डॉ) टीजी सीताराम, चेयरमैन, एआईसीटीई, पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा अपना और वेंचर कैटालिस्ट्स के सहयोग से संचालित, कैंपस टैंक भारत भर के यंग फाउंडर्स को देगा 6 मिलियन डॉलर का स्टार्टअप फंडिंग अवसर
नई दिल्ली, 6 सितंबर –
‘आज का युवा विकासशील भारत का निर्माता है। अगर हम वाकई अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करना चाहते हैं, तो हमें अपने विशाल मानव संसाधनों का भरपूर उपयोग करना होगा। हमारे पास सही माहौल है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश का नेतृत्व संभालने के बाद से बहुत कुछ बदल गया है। सभी को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। यह विचार के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब, नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यंग इनोवेटर्स के लिए भारत की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी-आधारित स्टार्टअप लॉन्चपैड ‘कैंपस टैंक’ के उद्घाटन के अवसर पर कहे। इस लॉन्चपैड का आयोजन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने भारत की सबसे बड़ी जॉब पोर्टल ‘अपना’ और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा देने वाली देश की अग्रणी वेंचर कैपिटल फंड ‘वेंचर कैटालिस्ट्स’ के सहयोग से किया गया है।
उन्होंने कहा, ” हमें इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। आज के युवा विकासशील भारत 2047 के निर्माता बनने जा रहे हैं। स्टार्टअप और एंटेरेन्योरशिप के क्षेत्र में उत्तर भारत को दक्षिण भारत के साथ कदम से कदम मिलाना होगा। औपनिवेशिक शासन के कारण उत्तर भारत में आज भी सरकारी नौकरियों का बोलबाला है, जो आपको मॉल के एक कमरे में कैद कर देती हैं। देश के इस हिस्से में, हमें अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। पिछले एक दशक में यह एक अद्भुत यात्रा रही है। विकसित भारत के विज़न को साकार करने के लिए हमें निजी क्षेत्र को यथासंभव शामिल करना होगा। इसके लिए, 30 वर्ष से कम आयु के इन्नोवेटर्स, जो भारत की 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और 6 मिलियन डॉलर के फंडिंग पूल वाला कैंपस टैंक एक बेहतरीन पहल है। यह विशेष रूप से उत्तर भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देगा, जो स्टार्टअप क्रांति के मामले में थोड़ा पिछड़ा हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “फंडिंग की कोई कमी नहीं है। साइंस और टेक्नोलॉजी में बजट में 900% की वृद्धि की गई है। हमने उद्योग जगत को पूरी आज़ादी दी है। हमने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और यूनिवर्सिटियों के लिए समर्पित योजनाएँ शुरू की हैं, जिनकी मदद से सरकारी फंडिंग का लोकतंत्रीकरण किया जा रहा है। इसलिए परिणाम सकारात्मक आ रहे हैं। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) 2024 में 133 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में भारत 39वें स्थान पर है। हमारे पास 1.8 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप हैं, जिनमें से लगभग 60% महिलानेतृत्व में हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में स्टार्टअप्स को एआई और एमएल जैसे क्षेत्रों से आगे बढ़ने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “भारत में, हमें कृषि, अंतरिक्ष और हिमालय जैसे कम विकसित क्षेत्रों में स्टार्टअप्स की ज़रूरत है। हमने सुगंधित फसलों की खेती और आवश्यक तेलों के उत्पादन को बढ़ाकर भारत के सुगंध उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अरोमा मिशन शुरू किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ पहले से जुड़े संबंधों के महत्व को समझती है और ज़्यादातर स्टार्टअप्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है क्योंकि सरकार उद्योग को एक साझेदार के रूप में देखती है। भारत में सबसे पहले विकसित की गई कोविड-19 वैक्सीन का उदाहरण देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि सरकार ने इसमें साझेदारी के लिए एक निजी कंपनी की पहचान की थी।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के इलावा, संसद सदस्य (राज्यसभा) और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर, सतनाम सिंह संधू, प्रोफेसर (डॉ) टीजी सीताराम, चेयरमैन, एआईसीटीई, सूर्यकांत, सीईओ, अटल इनक्यूबेशन सेंटर-बिमटेक, प्रोफेसर हिमानी सूद, प्रो चांसलर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, पद्मजा रूपारेल, आईएएन समूह में सीनियर मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर, सिद्धार्थ आनंद, एसोसिएट डायरेक्टर, एंटरप्राइज मार्केटिंग, अपना और डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा, सह-संस्थापक, वेंचर कैटलिस्ट्स अन्य शामिल थे।
इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न उद्योगों के 50 से अधिक स्टार्टअप में नेस्टहोम (रियल एस्टेट सेक्टर), ट्रैंक्विल एआई और डॉक्टरलैब (हेल्थटेक), 256 बिट्स स्टूडियो और केम0 (एआई डीपटेक) प्रोजेक्ट वरुण (सतत ऊर्जा) अरोमा (फूड टेक), वेल्ट्रियोनेक्स स्मार्ट क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड और एग्रीक्योर (एग्रीटेक) अन्य शामिल थे।
समारोह के दौरान संसद सदस्य (राज्यसभा) और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा, ”हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत की थी ताकि इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके और आर्थिक विकास एवं बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसरों के लिए एक संपन्न स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाया जा सके। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, टैक्स बेनिफिट्स, स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से शुरुआती चरण के वित्तपोषण और क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों के साथ, स्टार्टअप इंडिया पहल ने देश में एक जीवंत एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नौ वर्षों की छोटी सी अवधि में, भारत ने 1.89 लाख से अधिक स्टार्टअप और 1 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन वाले 119 यूनिकॉर्न के साथ खुद को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में मजबूती से स्थापित किया है।
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया भर में हमने देखा है कि कैसे कॉलेजों और यूनिवर्सिटीयों में उत्पन्न विचार करोड़ों डॉलर के बिजनेस बन जाते हैं और टॉप ग्लोबल कंपनियाँ कॉर्पोरेट बोर्डरूम में नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी या कॉलेज कैंपस में जन्म लेती हैं। एक केस स्टडी के अनुसार, अमेरिका में 10 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप्स में से 76 प्रतिशत यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में स्टूडेंट्स के आईडिया उत्पन्न हुए हैं। इनमें अमेरिका की टॉप मल्टीनेशनल कंपनियाँ शामिल हैं, जिनमें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से उत्पन्न गूगल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मार्क ज़करबर्ग द्वारा स्थापित फेसबुक, रीड कॉलेज और यूसी बर्कले से पढ़ाई छोड़ने वाले दो स्टूडेंट्स द्वारा स्थापित एप्पल और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और वाशिंगटन स्टेट कॉलेज के स्टूडेंट्स द्वारा सह-स्थापित माइक्रोसॉफ्ट शामिल हैं। पिछले एक दशक में, भारत के युवा नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं। कैंपस टैंक जैसी पहलों के माध्यम से, हमारा उद्देश्य इस विकास को पोषित करने और युवाओं को सशक्त बनाने में भूमिका निभाना है।
संधू ने कहा ’’भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 1 लाख 89 हजार से भी ज्यादा स्टार्टअप है, जो लगभग 18 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहे हैं और लगभग 12000 पेटेंट दर्ज करवा चुके है। भारत का दृष्टिकोण है कि 5000 यूनिकाॅर्न स्टार्टअप बनाकर इनोवेशन और एंट्रप्रन्योर्शिप को मजबूत करना है, जिसका लक्ष्य 2035 तक 1000 यूनिकाॅर्न हासिल करना है।‘‘
संधू ने कहा, ’’कैंपस टैंक जैसी पहलों के माध्यम से, हमारा उद्देश्य इस विकास को पोषित करने और एंट्रप्रन्योर्शिप की अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने में भूमिका निभाना है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, अपना और वेंचर कैटालिस्ट के बीच साझेदारी से स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, एक रिसर्च-केंद्रित यूनिवर्सिटी के रूप में, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स को नई तकनीकों की रिसर्च करने और विकास के नए अवसर खोलने के लिए प्रोत्साहित करती है। 2012 में अपनी स्थापना के बाद से, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने 150 से अधिक स्टार्टअप बनाए हैं, जिनमें से 8 का नेतृत्व लड़कियों द्वारा किया गया है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (सीयू-टीबीआई) स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये जुटा रहा है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पिछले 5 वर्षों में सबसे अधिक पेटेंट दाखिल करने वाली देश की 5 अग्रणी यूनिवर्सिटीयों में स्थान दिया गया है, जबकि पिछले 3 वर्षों में 2581 पेटेंट दाखिल करके भारत के सभी निजी और सरकारी यूनिवर्सिटीयों में तीसरा स्थान हासिल किया है।’’
भारत ग्लोबल इनोवेशन कैपिटल बनने की राह पर है : प्रोफेसर (डॉ.) टीजी सीताराम, चेयरमैन, एआईसीटीई, पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल
पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल के एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर (डॉ.) टीजी सीताराम ने कहा, “कैंपस टैंक के माध्यम से, हम केवल एक कार्यक्रम ही नहीं शुरू कर रहे हैं, बल्कि हम आकांक्षाओं को जन्म दे रहे हैं, रचनात्मकता को उजागर कर रहे हैं और भारत की एंटरप्रन्योरशिप की भावना को प्रज्वलित कर रहे हैं। कैंपस टैंक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की एक अनूठी पहल है जो सपनों, दृढ़ संकल्प और क्रांतिकारी विचारों को एक साथ लाती है ताकि नवप्रवर्तकों को अपने स्टार्टअप शुरू करने के लिए सशक्त बनाया जा सके। भारत 1.3 अरब से ज़्यादा लोगों के साथ इनोवेशन की एक अभूतपूर्व लहर देख रहा है, जिसमें हमारी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। आज हमारे पास एक जीवंत प्रतिभा उपलब्ध है और हमारे युवाओं की ऊर्जा भारत को एक एंटरप्रेन्योरशिप राष्ट्र में बदल सकती है। भारत ग्लोबल कैपिटल बनने की राह पर है।”
मदनगोपाल ने आगे कहा, “हम अपने देश के हर संस्थान में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति विकसित करने के लिए अभी से बीज बो रहे हैं क्योंकि ये भारत की विकास गाथा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। एआईसीटीई और अपना के साथ-साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बीच हमारे सहयोगात्मक कार्य के माध्यम से हम उद्यमिता इकोसिस्टम को पोषित कर उसे अगले स्तर तक ले जा सकेंगे। कैंपस टैंक एक उत्कृष्ट पहल है जो देश में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
‘अपना’ के एसोसिएट डायरेक्टर, एंटरप्राइज़ मार्केटिंग सिद्धार्थ आनंद ने कहा,”एंटरप्रेन्योर हमारे देश के लिए ज़रूरी बदलाव लाने वाले परिवर्तनकर्ता हैं जो अविष्कारों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाते हैं। कैंपस टैंक में 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों से 20,000 से ज़्यादा युवा फाउंडर्स ने रजिस्टर कर लिया है जबकि 500 से ज़्यादा सबमिशन हो चुके हैं जो देश के लगभग 95% कवरेज क्षेत्र के बराबर है। इनमें 35% महिलाएँ शामिल हैं जो समावेशिता को दर्शाती है। कैंपस टैंक जैसी पहलों और प्रधानमंत्री मोदी के विज़न के साथ हम एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रहे हैं जहाँ भारत 2047 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन जाएगा।
वेंचर कैटालिस्ट के को फाउंडर डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा ने कहा,”कैंपस टैंक का उद्देश्य है कि देश का प्रत्येक छात्र एंटरप्रेन्योर बनने की आकांक्षा रखे। हमारे प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य 10 लाख स्टार्टअप और 1,000 यूनिकॉर्न बनाना है और हम इस लक्ष्य को सहयोग करने के लिए यहाँ हैं। यह जानना दिलचस्प है कि अब तक 20,000 स्टार्टअप आइडियाज़ ने कैम्पस टैंक के लिए आवेदन किया है। इसलिए, हम देश के एन्त्रेप्रेंयूरिअल इकोसिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने और उसमें सहयोग करने के लिए यहाँ हैं। हमारा उद्देश्य अच्छे निवेशकों, स्टार्टअप्स और लोगों को जगह दिलाना और उनमें निवेश करना है। इसलिए, हम अच्छे एंटरप्रेन्योर्स और छात्र एंटरप्रेन्योर्स की तलाश में हैं।

