पूर्वी सिंहभूम, 1 दिसंबर
विश्व एड्स दिवस 2025 के अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल, जमशेदपुर ने समाज को एचआईवी-एड्स के प्रति जागरूक करने और रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को दोहराया है। इस अवसर पर अस्पताल के कंसल्टेंट एवं इंचार्ज, त्वचा विज्ञान विभाग, डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि एड्स कोई कलंक नहीं, बल्कि ऐसा संक्रमण है, जिसका समय पर निदान और नियमित उपचार से पूरी तरह नियंत्रण संभव है और मरीज स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
एक दिसंबर 1988 से मनाया जा रहा विश्व एड्स दिवस आज भी एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, उपचार और सामाजिक भेदभाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एचआईवी वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है और लंबे समय तक उपचार न मिलने पर एड्स का रूप ले लेता है। यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुइयों के उपयोग तथा गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान माँ से बच्चे में फैल सकता है। लेकिन यह छूने, साथ खाने, हवा, पसीने या लार से नहीं फैलता। इसलिए इससे जुड़े भ्रम दूर करना बेहद ज़रूरी है।
डॉ. कुमार के अनुसार, टाटा मेन हॉस्पिटल में एआरटी केंद्र के माध्यम से संक्रमित व्यक्तियों को नियमित और उन्नत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। हाल के वर्षों में लंबे समय तक प्रभावकारी इंजेक्टेबल एआरटी की उपलब्धता ने मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया है। इससे न केवल दैनिक दवाइयों की निर्भरता कम हुई है, बल्कि संक्रमण नियंत्रण में भी बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। वहीं PrEP जैसी रोकथाम दवाओं और स्व-परीक्षण किट ने संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया है।
विश्व एड्स दिवस 2025 की थीम “बाधाओं पर विजय प्राप्त करना, एड्स प्रतिक्रिया को बदलना यह संदेश देती है कि एचआईवी-एड्स से लड़ाई सिर्फ इलाज की नहीं, बल्कि जागरूकता और भेदभाव समाप्त करने की भी है। टाटा मेन हॉस्पिटल का प्रयास है कि हर संक्रमित व्यक्ति सम्मान, सुरक्षा और स्वस्थ जीवन पाने का अधिकार महसूस करे। समाज मिलकर आगे आए तो आने वाले वर्षों में एड्स-मुक्त दुनिया का सपना जरूर साकार होगा।

