नई दिल्ली, 28 जनवरी
केन्द्र सरकार ने वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत अधिसूचित एकसमान सहमति दिशा-निर्देशों में अहम संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य उद्योगों को मिलने वाली पर्यावरणीय मंज़ूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, देरी कम करना और पर्यावरणीय अनुपालन को मज़बूत करना है।
इस संशोधन से पिछले वर्ष जारी किए गए दिशा-निर्देश स्थापना सहमति (सीटीई) और संचालन सहमति (सीटीओ) प्रदान करने, अस्वीकार करने या रद्द करने के लिए की प्रक्रिया मेंं एकरुपता आएगी। ये दिशा-निर्देश देशभर में सहमति प्रबंधन में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि बड़े सुधार के तहत कंसेंट टू ऑपरेट की वैधता अवधि में बदलाव किया गया है। अब एक बार जारी होने के बाद सीटूओ तब तक मान्य रहेगा, जब तक उसे किसी उल्लंघन की स्थिति में रद्द न किया जाए। इससे बार-बार नवीनीकरण की ज़रूरत खत्म होगी और उद्योगों को परिचालन में राहत मिलेगी।
सरकार ने रेड कैटेगरी उद्योगों के लिए मंज़ूरी की समय-सीमा भी घटाकर 120 दिन से 90 दिन कर दी है। इसके अलावा, पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025 के तहत पंजीकृत पर्यावरण ऑडिटर को भी निरीक्षण और अनुपालन सत्यापन की अनुमति दी गई है।
मंत्रालय ने बताया कि
माइक्रो और छोटे उद्योग को राहत देते हुए अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाइयों के लिए स्व-प्रमाणित आवेदन पर ही कंसेंट टू एस्टैब्लिश को स्वीकृत माना जाएगा।
संशोधित गाइडलाइंस में अब न्यूनतम दूरी जैसे सख़्त मानकों की जगह स्थल-विशेष पर्यावरणीय आकलन को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही राज्य सरकारें 5 से 25 वर्षों के लिए एकमुश्त सीटूओ शुल्क तय कर सकेंगी।
सरकार का कहना है कि ये संशोधन ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए देशभर में एक समान और पारदर्शी कंसेंट व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

