रांची, 4 जनवरी 2026:
आज झारखंड की राजधानी रांची सहित संपूर्ण देश में ‘विश्व ब्रेल दिवस’ अत्यंत गरिमा के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन उस महापुरुष को समर्पित है जिन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद दुनिया के करोड़ों दृष्टिबाधितों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैलाया।
लुई ब्रेल: एक क्रांतिकारी आविष्कारक
4 जनवरी 1809 को फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल ने बचपन में एक दुर्घटना के कारण अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। महज़ 15 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी कुशाग्र बुद्धि से 1824 में ‘ब्रेल लिपि’ का आविष्कार किया। उन्होंने 12 बिंदुओं वाली जटिल सैन्य सांकेतिक भाषा को सरल बनाकर 6 बिंदुओं (6 Dots) के मास्टर कोड में तब्दील कर दिया। लुई ब्रेल का यह आविष्कार आज 200 वर्षों बाद भी दुनिया भर में दृष्टिबाधितों के पढ़ने और लिखने का एकमात्र प्रामाणिक माध्यम है।
ब्रेल साक्षरता पर श्री एस.के. रुंगटा का संदेश
इस अवसर पर नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड (NFB) के महासचिव और वर्ल्ड ब्लाइंड यूनियन के अध्यक्ष श्री एस.के. रुंगटा ने ब्रेल की प्रासंगिकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा:
“आज ब्रेल के आविष्कार को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए ब्रेल का ज्ञान होना उतना ही अनिवार्य है, जितना किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए अक्षर ज्ञान। भले ही आज हम तकनीक के युग में जी रहे हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी कभी भी ब्रेल की जगह नहीं ले सकती। ऑडियो माध्यम केवल सुनने का साधन हैं, जबकि ब्रेल वास्तविक साक्षरता, व्याकरण और बौद्धिक विकास का आधार है।”
उल्लेखनीय है कि श्री एस.के. रुंगटा हर वर्ष विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर 2 जनवरी को एनएफबी के मुंडका स्थित हॉस्टल में राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं, जिसमें ब्रेल रीडिंग, राइटिंग, कंप्यूटर स्किल, डिबेट और संगीत आदि शामिल हैं। साथ ही, 4 जनवरी 2026 को वैश्विक स्तर पर ब्रेल के महत्व से लोगों को जागरूक करने के लिए श्री सत्य साईं ऑडिटोरियम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और ब्रेल का समन्वय
आज के दौर में टेक्नोलॉजी ब्रेल को खत्म करने के बजाय उसे और सुगम बना रही है। ‘रिफ़्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले’ और ‘ब्रेल नोट-टेकर्स’ जैसी तकनीक ने दृष्टिबाधितों के लिए कंप्यूटर और मोबाइल पर ब्रेल में काम करना आसान बना दिया है। निष्कर्ष यह रहा कि तकनीक ब्रेल की सहायक तो हो सकती है, लेकिन उसका विकल्प कभी नहीं बन सकती।
मुख्य मांगें और अपील
नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड, शाखा झारखंड के समन्वयक श्री अरुण कुमार सिंह विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर निम्नलिखित विभिन्न बिंदुओं पर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं:
श्री अरुण कुमार सिंह झारखंड सरकार से विशेष अपील करते हैं कि सरकार को ब्रेल पुस्तकें और उपकरण सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि सुदूर ग्रामीण इलाकों के गरीब दृष्टिबाधित भी इसका लाभ उठा सकें और शिक्षा से जुड़ सकें।
सभी शैक्षणिक संस्थानों में ब्रेल किट और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता अनिवार्य हो।
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (जैसे लिफ्ट, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों) में ब्रेल संकेतों का उपयोग बढ़ाया जाए।
लुई ब्रेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम ब्रेल लिपि के प्रचार-प्रसार को और अधिक गति दें ताकि कोई भी दृष्टिबाधित व्यक्ति शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड (NFB) रांची, झारखण्ड |

