नई दिल्ली, 04 फ़रवरी
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामले पर सुनवाई में बुधवार काे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोर्ट में मौजूद रहेंगी। ममता बनर्जी ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय से खुद दलीलें रखने के लिए अनुमति मांगी है।
ममता बनर्जी ने कहा है कि वो एसआईआर प्रक्रिया से पश्चिम बंगाल के लोगों को हो रही परेशानियों को समझती हैं। वे उच्चतम न्यायालय की नियमावली को भी जानती हैं। इस अर्जी के जरिये ममता बनर्जी इस मामले में खुद दलीलें पेश करना चाहती हैं।
ममता बनर्जी ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। इस मामले में निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी पर एसआईआर की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। आयोग ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि ममता बनर्जी ने एसआईआर की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए भड़काऊ भाषण दिया।
हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों का माहौल है, जो अन्य राज्यों से अलग है। आयोग ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और प्रशासन चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल के सवा करोड़ से ज्यादा मतदाताओं की ‘तार्किक विसंगति’ सूची को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि जिन मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति की सूची में है उसे सार्वजनिक किया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, तालुका स्तर के ब्लॉक कार्यालयों और और वार्ड कार्यालयों में लगाई जाए, ताकि आम लोग इसे आसानी से देख सकें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया था कि यह विसंगतियां मुख्य रूप से 2002 की मतदाता सूची से वंश (प्रोजेनी) मिलान के दौरान सामने आई हैं। इसमें मतदाता और उसके माता-पिता के नाम में मेल न होना, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा होना जैसे प्रावधान शामिल है।

