नई दिल्ली, 11 अप्रैल
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड (एनपीसीसी) के लगभग 60.30 करोड़ रुपये के ठेकों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वतखोरी के मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिसकी जांच अभी जारी है।ईडी ने शनिवार को एक बयान में बताया कि प्रवर्तन निदेशालय के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने असम की एक विशेष पीएमएलए अदालत में कई व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ एक अभियोजन शिकायत दायर की गई है। इनमें एनपीसीसी के पूर्व अधिकारी और ठेकेदार भी शामिल हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि यह मामला भारत-बांग्लादेश सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ठेकों में कथित रिश्वतखोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का है।
ईडी ने कहा कि यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई की एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें बॉर्डर आउट पोस्ट के लिए लगभग 60.30 करोड़ रुपये का ठेकों देने और उनकी प्रोसेसिंग में कथित तौर पर अवैध रूप से पैसे लेने का आरोप है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय के गुवाहाटी जोनल ऑफ़िस ने गुवाहाटी में विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष सिलचर स्थित एनपीसीसी के सेवानिवृत्त जोनल मैनेजर राकेश मोहन कोटवाल, एनपीसीसी के जलपाईगुड़ी प्रोजेक्ट ऑफिस के प्रभारी अधिकारी लतीफुल पाशा, श्रीगौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के निदेशक अनीश बैद एवं बिनोद सिंघी व अन्य और कंपनी के ख़िलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत एक अभियोजन शिकायत दायर की है।
जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला एनपीसीसी लिमिटेड, (बीएसएफ की ओर से) द्वारा श्रीगौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को भारत-बांग्लादेश सीमा पर 9 सीमा चौकियों (समूह सी और डी) के निर्माण के लिए दिए गए लगभग 60.30 करोड़ रुपये के ठेकों से जुड़े रिश्वत के एक मामले से संबंधित है।
ईडी की शुरुआती जांच में पता चला कि बकाया बिलों को पास कराने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई थी और उसे हवाला चैनलों के ज़रिए भेजा गया था। इसके बाद में छापेमारी के दौरान कुछ रकम बरामद भी की गई। ईडी ने बताया कि अपराध से हासिल की गई रकम आरोपियों के बीच बांटी गई थी और इस पूरे नेटवर्क की आगे की जांच अभी जारी है।

