स्टॉक मार्केट में वाह केमिकल्स की प्रीमियम लिस्टिंग, मुनाफे में आईपीओ निवेशक

नई दिल्ली, 11 जून 

टेक्सटाइल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले केमिकल का उत्पादन करने वाली कंपनी वाह केमिकल्स के शेयरों ने आज बढ़त के साथ स्टॉक मार्केट में एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 60 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 16.67 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 70 रुपये के स्तर पर हुई। मजबूत लिस्टिंग के बाद बाजार में लिवाली शुरू हो जाने के कारण थोड़ी देर में ही ये शेयर उछल कर 71 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में मुनाफा वसूली शुरू होने पर ये 66.50 रुपये के स्तर तक गिर कर बंद हुआ। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 6.50 रुपये यानी 10.83 प्रतिशत का मुनाफा हो गया।

वाह केमिकल्स का 13.45 करोड़ रुपये का आईपीओ चार से आठ जून के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 87.17 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 74.08 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 100.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 22.42 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं।

आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, पुराने कर्ज को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी। वाह केमिकल्स की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी को 2.58 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 5.09 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में इसे 23.75 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 43.19 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में मामूली बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में कंपनी पर 11.25 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 11.31 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।