खूंटी, 22 जुलाई
झारखंड के खूंटी जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने जिले के प्रसिद्ध जलप्रपातों और नदी-नालों को नया जीवन दे दिया है। पहाड़ों से प्रचंड वेग से उतरती जलधाराएं, घने साल और सखुआ के जंगल, बादलों से घिरी पहाड़ियां तथा चारों ओर फैली हरियाली इन दिनों खूंटी की प्राकृतिक सुंदरता को अपने चरम पर पहुंचा रही हैं। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल इन दिनों पर्यटकों से गुलजार हैं। हालांकि प्रकृति का यह मनमोहक रूप अब रौद्र स्वरूप भी धारण कर चुका है। लगातार बढ़ता जलस्तर, तेज बहाव, फिसलन भरी चट्टानें और उफनती नदियां किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकती हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्कता बरतने और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।
पिछले 24 घंटे के दौरान हुई लगातार बारिश का असर जिले के लगभग सभी प्रमुख जलप्रपातों और नदी-नालों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहाड़ियों से बड़ी मात्रा में पानी उतरने के कारण झरनों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। सामान्य दिनों में शांत और सौम्य दिखाई देने वाले जलप्रपात अब प्रचंड वेग से गिरती जलधाराओं के कारण अत्यंत आकर्षक और रोमांचक नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर पानी का प्रवाह इतना तेज हो गया है कि उसकी गर्जना दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। तेज बहाव के कारण कई जगह नदी किनारों का कटाव भी बढ़ गया है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है।
खूंटी जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पेरवा घाघ, पंचघाघ, रानी फॉल, सप्तधारा, चंचला घाघ, पाण्डु पुडिंग, रिमिक्स फॉल सहित कई अन्य जलप्रपातों में इन दिनों पानी का बहाव कई गुना बढ़ गया है। इन स्थलों पर गिरती विशाल जलधाराएं, घने जंगलों की हरियाली और धुंध से ढकी पहाड़ियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग तथा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। कई पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कर रहे हैं।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान जलप्रपातों का आकर्षण जितना बढ़ जाता है, खतरा भी उतना ही बढ़ जाता है। लगातार बारिश के कारण चट्टानों पर काई जम जाती है, जिससे वे अत्यधिक फिसलन भरी हो जाती हैं। कई बार पर्यटक बेहतर तस्वीर या वीडियो बनाने के लिए जलधारा के बिल्कुल निकट पहुंच जाते हैं या ऊंची चट्टानों पर चढ़कर सेल्फी लेने का प्रयास करते हैं। ऐसी लापरवाही कुछ ही क्षणों में गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। तेज बहाव में संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति को बचाना बेहद कठिन हो जाता है, क्योंकि बरसात के मौसम में बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
संभावित दुर्घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने लोगों से जलप्रपातों के किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने, तेज बहाव वाले क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने तथा बैरिकेडिंग, सुरक्षा घेरों और चेतावनी संकेतों का पूरी तरह पालन करने की अपील की है। जंगलों और खतरनाक चट्टानों पर सेल्फी लेने से बचने तथा बच्चों पर विशेष नजर रखने की भी सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद सुरक्षित दूरी से लेना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार तरीका है।
बारिश के कारण जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों तथा अन्य विषैले जीव-जंतुओं के निकलने की आशंका भी बढ़ गई है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में सांप अपने बिलों से निकलकर घरों, खेतों और झाड़ियों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में घरों और आसपास की नियमित सफाई रखें, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें तथा घास या झाड़ियों में बिना सावधानी के प्रवेश न करें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने का प्रयास नहीं करें, बल्कि तत्काल वन विभाग, स्थानीय प्रशासन या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। सांप के काटने की स्थिति में बिना किसी झाड़-फूंक के सीधे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी जिले में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि वर्षा का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहता है तो जलप्रपातों, नदी-नालों और जलाशयों का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है तथा आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और निगरानी की व्यवस्था करने की तैयारी भी की जा रही है। लोगों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर ध्यान देने और अनावश्यक यात्रा या जोखिम से बचने की अपील की गई है।
मानसून के दौरान खूंटी के जलप्रपात झारखंड के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाते हैं। हर वर्ष हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाओं, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को आर्थिक लाभ मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यटन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए तो खूंटी का प्राकृतिक पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूती दे सकता है। इसके लिए संवेदनशील स्थलों पर प्रशिक्षित लाइफगार्ड, त्वरित बचाव दल, सीसीटीवी निगरानी, सूचना पट्ट, चेतावनी बोर्ड और पर्यटकों के लिए जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है।

