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हाई कोर्ट ने सैप के प्रथम एवं द्वितीय वाहिनी के 721 कर्मियों को हटाए जाने के आदेश पर लगाई रोक
रांची, 30 अगस्त
झारखंड हाई कोर्ट ने विशेष सहायक पुलिस (सैप) प्रथम एवं द्वितीय के 721 कर्मियों को हटाए जाने के राज्य सरकार के 27 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज एवं तान्या सिंह ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने उनकी सेवा 31 अगस्त से समाप्त कर दी है जबकि इनकी उम्र सीमा सेवानिवृत्ति के निर्धारित 60 वर्ष से भी कम है। कुछ कर्मियों की उम्र 45 वर्ष भी है लेकिन इन्हें हटा दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (ईसीएल) ने राज्य सरकार से 1900 से अधिक सैप कर्मियों की सेवा मांगी है। सीसीएल ने भी सुरक्षा के लिए सैप कर्मियों की सेवा मांगी है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सैप बटालियन में संविदा पर बहाल पूर्व सैनिकों की सेवा 31 अगस्त से समाप्त करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी गई थी।
हाई कोर्ट ने चाईबासा में मनरेगा योजना में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट ईडी को सौंपने के दिए निर्देश
हाई कोर्ट ने चाईबासा जिले में मनरेगा में वित्तीय अनियमितता की जांच का जिम्मा ईडी को दिया है। यह मामला 28 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। 28 करोड़ की योजनाओं में क्वालिटी खराब होने की बात है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ईडी को जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
चाईबासा के तत्कालीन डीसी श्रीनिवासन के समय में वित्तीय अनियमितता सामने आयी थी। मामले को लेकर चाईबासा पुलिस ने 14 एफआईआर दर्ज किए थे। वर्ष 2013 में हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की गई थी, जिसमें हाइ कोर्ट ने राज्य सरकार से दर्ज मामले की जानकारी मांगी थी। हालांकि, सरकार की तरफ से जानकारी नहीं दी गई।
इसके बाद 2021 में दोबारा मामले को लेकर पीआईएल दायर की गयी। याचिका में बताया गया था कि बिना काम के अग्रिम भुगतान किया गया जबकि धरातल पर किसी तरह का काम नहीं किया गया। याचिकाकर्ता स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी।

