मप्र के उज्जैन में नाजिया खान ने किया पितरों का तर्पण, बोलीं- पाकिस्तान से धमकी मिली, मैं डरने वाली नहीं

उज्जैन, 10 अक्टूबर

उच्चतम न्यायालय की वकील और भाजपा नेता नाजिया खान ने शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर मध्य प्रदेश के उज्जैन के रामघाट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। शिप्रा नदी के किनारे करीब एक घंटे तक पूजन-अर्चन करने के बाद उन्होंने कहा कि तर्पण की जानकारी सामने आने के बाद उन्हें धमकी भरे कॉल आए। नाजिया ने कहा कि इन धमकियों से वह डरने वाली नहीं हैं।

नाजिया खान शनिवार सुबह करीब 11 बजे उज्जैन पहुंचीं और रामघाट पर विधि-विधान से तर्पण किया। उन्होंने कहा कि वह अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना चाहती थीं। नाजिया ने पंडित से अपने खानदान में बकरीद यानी ईद-उल-अजहा के दौरान दी गई पशुओं की कुर्बानी का जिक्र किया था। उन्होंने उन जानवरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए भी पूजा कराने की इच्छा जताई। उन्होंने पंडित ने इसके लिए अलग से पूजा कराई।

नाजिया खान ने कहा कि तर्पण करने की बात सामने आने के बाद उन्हें पाकिस्तान के शहजाद भट्टी के टेररिस्ट नेटवर्क से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और जम्मू-कश्मीर से भी धमकी भरे कॉल आने की बात कही। उन्होंने बताया कि उन्हें करीब सात से आठ बार फोन आए। कॉल करने वालों ने उन्हें तर्पण नहीं करने को कहा और आने-जाने के दौरान सतर्क रहने की चेतावनी दी। नाजिया ने कहा, “मुझे कहा गया है कि संभलकर आना और संभलकर जाना, कहीं भी कुछ भी हो सकता है। लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूं।” हालांकि धमकी मिलने के उनके दावों की पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान हुई पत्थरबाजी और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर भी नाजिया खान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि संबंधित लोगों को पुलिस पर टिप्पणी करने से पहले अपने दस्तावेज देखने चाहिए। उन्होंने कहा, “पत्थरबाजी क्या लॉ एंड ऑर्डर के अंदर आता है? गाली-गलौज क्या लॉ एंड ऑर्डर के अंदर आता है?” नाजिया ने सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए पुलिस के खिलाफ अफवाहें फैलाए जाने का आरोप भी लगाया।

गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिम युवकों के शामिल होने से जुड़े सवाल पर नाजिया खान ने कहा कि मुस्लिम समाज को ऐसे आयोजनों में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि जो लोग अल्लाह और पैगंबर मोहम्मद की सुन्नत पर चलते हैं, उनके लिए गरबा और डांडिया में शामिल होना हराम है।