रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 करने की मांग

भारतीय रेलवे मजदूर संघ का राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह 28 अक्टूबर तक, दीपावली से पहले वर्ष 2025-26 के बोनस की अंतर राशि के भुगतान की मांग

भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर 

भारतीय रेलवे मजदूर संघ ने रेलवे कर्मचारियों के उत्पादकता-संबद्ध बोनस की गणना सीमा मौजूदा ₹7,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹18,000 करने की मांग को लेकर 22 से 28 अक्टूबर तक राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह आयोजित किया है। ईस्ट कोस्ट रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री त्रिलोचन साहू ने मांग की है कि संशोधित सीमा के अनुसार वर्ष 2025-26 के बोनस की अंतर राशि का भुगतान दीपावली 2026 से पहले किया जाए।

त्रिलोचन साहू ने कहा कि भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा है। रेलवे कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करते हुए यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने, माल परिवहन, रेलवे परिसंपत्तियों के रखरखाव और देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 1,670 मिलियन टन रिकॉर्ड माल लदान और लगभग 7.41 अरब यात्रियों के परिवहन की उपलब्धियां कर्मचारियों की मेहनत, समर्पण और कार्यक्षमता को दर्शाती हैं।

साहू ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के उत्पादकता-संबद्ध बोनस को मंजूरी देना स्वागतयोग्य है। हालांकि, अधिकतम ₹17,951 की बोनस राशि वर्षों से अपरिवर्तित बनी हुई है। रेलवे की उत्पादकता और कर्मचारियों के कार्यभार में लगातार वृद्धि के बावजूद बोनस की गणना सीमा में अपेक्षित संशोधन नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा है और उनके मनोबल पर असर पड़ रहा है।

उन्होंने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के 28 अगस्त 2015 के पत्र तथा बोनस गणना सीमा से संबंधित राजपत्र अधिसूचना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान वेतन संरचना, बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों के योगदान को देखते हुए इस सीमा की समीक्षा जरूरी है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के अंतर्गत निर्धारित ₹18,000 के न्यूनतम मूल वेतन के अनुरूप बोनस की गणना सीमा बढ़ाने के लिए सरकार को आवश्यक नीतिगत और कानूनी संशोधन करने चाहिए।

साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में रेलवे कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में कर्मचारियों के योगदान और उपलब्धियों का सम्मान केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप न्यायसंगत आर्थिक लाभ भी मिलना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि बोनस की गणना सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह की जाए और संशोधित सीमा सभी पात्र रेलवे कर्मचारियों पर तत्काल लागू की जाए। इसके साथ ही वर्ष 2025-26 के उत्पादकता-संबद्ध बोनस की अंतर राशि का भुगतान दीपावली से पहले किया जाए। उन्होंने वेतन संरचना, न्यूनतम मजदूरी, महंगाई और रेलवे की बढ़ती उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए बोनस गणना सीमा की नियमित समीक्षा की व्यवस्था करने की भी मांग की।

भारतीय रेलवे मजदूर संघ के राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह के तहत 22 से 26 अक्टूबर तक शाखा स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत पोस्टर अभियान और पर्चों के वितरण के माध्यम से कर्मचारियों को मांगों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

27 अक्टूबर को मंडल मुख्यालयों और कार्यशालाओं के मुख्य द्वारों पर धरना, गेट मीटिंग तथा विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, 28 अक्टूबर को जोनल मुख्यालयों और उत्पादन इकाइयों के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। ये ज्ञापन मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम), मुख्य कार्यशाला प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम), महाप्रबंधक (जीएम) अथवा उपलब्ध विभागाध्यक्ष (एचओडी) के माध्यम से भेजे जाएंगे।

त्रिलोचन साहू ने सभी रेलवे कर्मचारियों से आंदोलन में एकजुट होकर सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल बोनस में वृद्धि की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के सम्मान, न्यायसंगत अधिकारों और उनके योगदान की उचित पहचान से भी जुड़ा है।