नई दिल्ली, 23 अप्रैल
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को सुनवाई से हटाने की मांग करने वाली याचिका पर हुई सुनवाई से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है। जस्टिस वी कामेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश देने के साथ ही अरविंद केजरीवाल को नोटिस भी जारी किया।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफार्म मेटा ने कहा कि उसने कुछ यूआरएल को हटा दिया है। सुनवाई के दौरान गूगल की ओर से कहा गया कि उसने यूट्यूब का कोई लिंक नहीं हटाया है, क्योंकि उनमें कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग नहीं है। इसका याचिकाकर्ता ने विरोध किया और कहा कि उन लिंक में भी कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो मौजूद हैं। उसके बाद कोर्ट ने गूगल को निर्देश दिया कि वो कोर्ट की कार्यवाही से संबंधित सभी वीडियो हटाएं।
इसके पहले 22 मार्च को जस्टिस तेजस करिया ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
याचिका वकील वैभव सिंह ने दायर की है। याचिका में दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से केजरीवाल को बरी करने के विरुद्ध केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटने की मांग की सुनवाई के वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पूरनदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के विरुद्ध कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से हटाए जाएं। याचिका में केजरीवाल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कोर्ट में बिना आधार के भ्रामक दलीलें दी। केजरीवाल ने कोर्ट का मान कम करने के लिए कई अनर्गल आरोप लगाए। याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल की दलीलों को रिकॉर्ड कर उन्हें एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के विभिन्न चैनल्स पर अपलोड किया गया। ऐसा कर आम लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई। इसके जरिये कोर्ट और केंद्र सरकार पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसके पहले याचिकाकर्ता वकील वैभव सिंह ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से शिकायत कर केजरीवाल और दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने 20 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल की सुनवाई से हटने की मांग खारिज कर दी थी। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि केवल अनुमान के आधार पर किसी मामले की सुनवाई से नहीं हटाया जा सकता है।

