चारा घोटाला: सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट से झटका, लालू यादव की जमानत रद्द करने की मांग खारिज

नई दिल्ली, 14 जुलाई 

उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाला से जुड़े देवघर मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की मांग खारिज कर दी। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि उच्च न्यायालय के जमानत के आदेश में हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय में अपील 2018 में की गयी है। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से अपील का निपटारा छह महीने में करने का आदेश दिया। सीबीआई ने 2018 में लालू यादव को मिली सजा को बढ़ाने के लिए झारखंड उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी।

इसकी सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि इस मामले के आरोपित 60 वर्ष से ऊपर के हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की सजा को निलंबित कर कानून का गलत इस्तेमाल किया है। ये आदेश गैरकानूनी है।

सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में कई आरोपित हैं और कुछ ने अभी तक सीबीआई की याचिका का जवाब नहीं दिया है। कुछ को तो कोर्ट का समन भी नहीं मिला है। तब कोर्ट ने कहा था कि हम जानते हैं कि ये याचिका क्या है। हम ये समझते हैं कि सीबीआई और लालू प्रसाद यादव के वकील इसका परिणाम जानते हैं। आप अपना काम कीजिए और हम अपना काम कर रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव ने अपने जवाब में सीबीआई की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि केवल इस आधार पर कि सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट है उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती है।

सीबीआई ने लालू यादव को झारखंड के देवघर कोषागार के चारा घोटाला मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से मिली जमानत को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में इस मामले में लालू यादव को पांच साल की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने 2019 में लालू यादव के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश को सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। लालू यादव कुल चार मुकदमों में सजायाफ्ता हैं।