खूंटी, 21 जून
झारखंड के खूंटी जिले में उग्रवाद विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के एरिया कमांडर श्रवण दास को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से अवैध हथियार, कारतूस, संगठन से जुड़े दस्तावेज, प्रचार सामग्री और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाने के दौरान उसने भागने का प्रयास किया और पुलिस दल पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। वर्तमान में उसका इलाज रांची के रिम्स अस्पताल में चल रहा है।
खूंटी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ऋषभ गर्ग ने रविवार को जरियागढ़ थाना क्षेत्र के इंदवन में आयोजित प्रेस वार्ता में पूरी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पीएलएफआई का सक्रिय सदस्य श्रवण दास अपने कुछ सहयोगियों के साथ क्षेत्र में किसी बड़ी उग्रवादी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने विशेष छापेमारी दल का गठन किया और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी।
एसपी ने बताया कि तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर श्रवण दास और उसके साथियों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से हथियार और कारतूस बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ में श्रवण दास ने स्वीकार किया कि उसने संगठन के उपयोग के लिए कुछ अतिरिक्त हथियार और गोला-बारूद विभिन्न स्थानों पर छिपाकर रखे हैं।
इसके बाद पुलिस टीम उसे उसकी निशानदेही पर हथियारों की बरामदगी के लिए जरियागढ़ थाना क्षेत्र के इंदवन जंगल लेकर गई। वहां से छिपाकर रखे गए हथियारों और अन्य सामग्री को बरामद किया गया। इसी दौरान श्रवण दास ने मौके का फायदा उठाकर पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार भागने के क्रम में उसने एक सब-इंस्पेक्टर की सरकारी पिस्तौल छीन ली और पुलिस दल पर गोली चला दी।
अचानक हुई इस घटना से वहां तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस ने पहले उसे आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन उसके नहीं मानने और लगातार खतरा पैदा करने पर आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इस दौरान श्रवण दास के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस टीम ने तत्काल उसे अपने कब्जे में लेकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया और बाद में बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेज दिया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस अभियान के दौरान कुल चार छोटे हथियार और 29 कारतूस बरामद किए गए हैं। बरामद कारतूसों में पिस्तौल और देसी कट्टे में इस्तेमाल होने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पीएलएफआई संगठन से जुड़े पर्चे, प्रचार सामग्री और एक महत्वपूर्ण डायरी भी जब्त की गई है। पुलिस का मानना है कि बरामद दस्तावेज संगठन के नेटवर्क, वित्तीय गतिविधियों, लेवी वसूली तंत्र और सक्रिय सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
एसपी ऋषभ गर्ग ने कहा कि श्रवण दास लंबे समय से खूंटी और आसपास के जिलों में सक्रिय था तथा संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लेवी वसूली, ठेकेदारों को धमकाने, विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने और क्षेत्र में दहशत फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हाल के दिनों में उसने कर्रा थाना क्षेत्र में रेलवे निर्माण कार्य से जुड़े एक परियोजना स्थल पर फायरिंग की थी और वहां खड़ी कई मशीनों एवं वाहनों में आग लगा दी थी। इसके अलावा तोरपा क्षेत्र में एक गैस गोदाम पर गोलीबारी तथा सुंदारी क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल परियोजना से जुड़े ठेकेदारों से लेवी मांगने की घटनाओं में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। इन घटनाओं के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए थे और स्थानीय लोगों में भय का माहौल उत्पन्न हुआ था।
एसपी ने कहा कि श्रवण दास की गिरफ्तारी पीएलएफआई के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा और क्षेत्र में शांति एवं विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस उग्रवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है और किसी भी उग्रवादी संगठन को कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पुलिस संगठन से जुड़े अन्य सक्रिय सदस्यों और सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने उग्रवादी गतिविधियों में शामिल युवाओं और अन्य लोगों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार उपलब्ध कराने और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास, शिक्षा और रोजगार ही क्षेत्र की प्रगति का रास्ता है, जबकि हिंसा और उग्रवाद केवल नुकसान पहुंचाते हैं।
एसपी ने विश्वास जताया कि पुलिस और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का वातावरण और अधिक मजबूत होगा तथा उग्रवाद की शेष चुनौतियों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।

